इन्द्रधनुष के रंगों को मैं ढूंढ़ रहा बाज़ारों में;
हँसी ठहाके मौन मंच और शंका के गलियारे में ;
पर रंग सरीखे भाव नहीं थे हर कोना मैं ढूंढ़ चूका;
छुपे पड़े थे रंग वो सारे मन की चारदीवारों में;
इन्द्रधनुष के ……………………
श्वेत वर्ण पर स्वच्छ नहीं था ,
मिली उपाधि दक्ष नहीं था ;
घोषित हुआ कि वो था कंचन ,
पर हिमकण के समकक्ष नहीं था ;
लाल वर्ण ज्वलंत नहीं है ,
यह आदि है अंत नहीं है;
भगवावेष को धरने वाला हर कोई ,
भिक्षुक है पर संत नहीं है;
हरा रंग हरियाली गायब ,
भरे खेत और थाली गायब ;
हर घर में जो खाना देता ,
उसके मुख से लाली गायब ;
खुशी का सूचक रंग है पीला ,
हर खुशियों में चेहरा गीला ;
बनते हैं पकवान अनेकों ,
पर हर मौके पर चेहरा पीला ;
अब और रंगों की आस है छोड़ी ,मैनें इन नज़ारों में;
इन्द्रधनुष के रंगों................................................
हँसी ठहाके मौन मंच और शंका के गलियारे में ;
पर रंग सरीखे भाव नहीं थे हर कोना मैं ढूंढ़ चूका;
छुपे पड़े थे रंग वो सारे मन की चारदीवारों में;
इन्द्रधनुष के ……………………
श्वेत वर्ण पर स्वच्छ नहीं था ,
मिली उपाधि दक्ष नहीं था ;
घोषित हुआ कि वो था कंचन ,
पर हिमकण के समकक्ष नहीं था ;
लाल वर्ण ज्वलंत नहीं है ,
यह आदि है अंत नहीं है;
भगवावेष को धरने वाला हर कोई ,
भिक्षुक है पर संत नहीं है;
हरा रंग हरियाली गायब ,
भरे खेत और थाली गायब ;
हर घर में जो खाना देता ,
उसके मुख से लाली गायब ;
खुशी का सूचक रंग है पीला ,
हर खुशियों में चेहरा गीला ;
बनते हैं पकवान अनेकों ,
पर हर मौके पर चेहरा पीला ;
अब और रंगों की आस है छोड़ी ,मैनें इन नज़ारों में;
इन्द्रधनुष के रंगों................................................