"हे वीर ! उठा शमशीर ! बदल तक़दीर !
आज फिर मौका आया है ;
हर क्षण पीड़ा को झेल रही भारत माँ ने ,
आज फिर तुझे बुलाया है;
हे लाल ! बुरा है हाल ,
मेरा अब तू ही सहारा है ;
इन रिपुओं पर कर वार ,उठा तलवार !
मेरा अब तू ही सहारा है ;
हर संध्या भयभीत करे है ,और क्रंदन संगीत करे है ;
पता नहीं कब कौन चला दे,सीमा पर तलवार ;
अब और नहीं बलकार ,तुझे तेरी माँ ने बुलाया है ;
आज फिर मौका आया है;
हे वीर! उठा शमशीर ! बदल तक़दीर !
तेरा बचपन , मेरा जीवन ;
मेरा जीवन ,हाथ में तेरे ;
इसे बचाना कर्म है तेरा ;
खड़े है रिपुदल ,जिसको घेरे ;
लहू-सरिता जब बहती है ,आहत मुझको कर देती है ;
लहू बहा हो चाहे जिसका ,होता छलनी मेरा सीना ;
वो भी मेरा तू भी मेरा ,तू सपूत और वो कपूत है ;
पर मैं ठहरी अबला माता ;जिसका मुश्किल हुआ है जीना ;
मेरा अंश ही ना जाने कब ,मुझ पर कर दे वार ;
अब तू ही उसे ललकार ,तुझे तेरी माँ ने बुलाया है;
आज फिर मौका आया है;
"हे वीर ! उठा शमशीर ! बदल तक़दीर !
आज फिर मौका आया है ;
हर क्षण पीड़ा को झेल रही भारत माँ ने ,
आज फिर तुझे बुलाया है;"
आज फिर मौका आया है ;
हर क्षण पीड़ा को झेल रही भारत माँ ने ,
आज फिर तुझे बुलाया है;
हे लाल ! बुरा है हाल ,
मेरा अब तू ही सहारा है ;
इन रिपुओं पर कर वार ,उठा तलवार !
मेरा अब तू ही सहारा है ;
हर संध्या भयभीत करे है ,और क्रंदन संगीत करे है ;
पता नहीं कब कौन चला दे,सीमा पर तलवार ;
अब और नहीं बलकार ,तुझे तेरी माँ ने बुलाया है ;
आज फिर मौका आया है;
हे वीर! उठा शमशीर ! बदल तक़दीर !
तेरा बचपन , मेरा जीवन ;
मेरा जीवन ,हाथ में तेरे ;
इसे बचाना कर्म है तेरा ;
खड़े है रिपुदल ,जिसको घेरे ;
लहू-सरिता जब बहती है ,आहत मुझको कर देती है ;
लहू बहा हो चाहे जिसका ,होता छलनी मेरा सीना ;
वो भी मेरा तू भी मेरा ,तू सपूत और वो कपूत है ;
पर मैं ठहरी अबला माता ;जिसका मुश्किल हुआ है जीना ;
मेरा अंश ही ना जाने कब ,मुझ पर कर दे वार ;
अब तू ही उसे ललकार ,तुझे तेरी माँ ने बुलाया है;
आज फिर मौका आया है;
"हे वीर ! उठा शमशीर ! बदल तक़दीर !
आज फिर मौका आया है ;
हर क्षण पीड़ा को झेल रही भारत माँ ने ,
आज फिर तुझे बुलाया है;"