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Sunday, 7 June 2015





शायरी

 

"वो बुर्क़ा भी हो गया  काला , ज़माने की नज़रें ले ले कर;

शायद ख़ुदा भी फ़क़ीर हो गया,तुझे ऐसा हुस्न दे दे कर;

गिला ये नहीं हमें, कि हम अधूरे हैं;

अरे ! हम तो थक गए हैं; वफ़ादारी का इंम्तेहाँ दे दे कर;"

 

 

"उनकी अदाएं भी क़ातिलाना है, और जुल्फें भी

पहली बिजलियाँ गिराती है , तो दूसरी बरसात लाती है;"

 

 

"उनकी दस्तक़ का इंतेज़ार हम करते रहे,

वो आएंगे , ये सोच दरवाज़े  दीदार हम करते रहे;

पर शायद भूल गए थे हम , कि वो तो बेवफ़ा हैं;

और हम उनका ऐतबार करते रहे;"

 

 

"कोई मशग़ूल खुद में इस क़दर हुआ है ;

कि वो अपना भी गैर सा हुआ है;

ना इल्म है उसे , और ना ही ख़बर है ;

कि उसकी याद में ये गैर, ज़िंदा रहकर भी मुर्दे सा हुआ  है;"

 

 

 

"ख्वाईश नहीं कि जंहा को अपना बनाऊं;

ख्वाईश नहीं कि सबके दिल-ओ-दिमाग  पर छा जाऊं;

ख्वाईश नहीं कि शान-ओ-शौहरत पाऊं;

बस आरज़ू तो ज़रा सी है कि ,

आदम की औलाद हुँ , खुद को आदमी साबित कर जाऊं;"


Friday, 29 May 2015

Wo shaam Suhaani

"वो शाम सुहानी , मस्तानी ; जब दिल ने करी थी मनमानी ;
 Lonliness को दूर किया तब, friendship हमने कर डाली;

वो थोड़ी सी शरमाई थी, ना जाने क्यों घबराई थी;
काली-काली जुल्फ़ें उसकी, मानो बदरा घिर आई थी;
गूंगे-बहरे सा होकर मैं,बस उसको ही था देख रहा;
बिन हाथ लगाए whisky को,कैसी मदहोशी छायी थी;

क्या मुखड़ा था उस गोरी का,सरल-सलोनी छोरी का;
क्या मधुर बोल उसके निकले, ज्यों गीत सुना हो लोरी का;
अब शाम हो गयी हमें है चलना,सखी चलो जल्दी है चलना;
यों कहने लगी वो हड़बड़ में, ज्यों काम किया हो चोरी का;

Sense मुझे जल्दी से आया , पानी आँखों पे छिड़काया ;
अरे! तू कह दे , जो कहना है; दिल ने मेरे मुझे समझाया;
हिम्मत करले ,आगे बढ़ जा; आज मिला है मौका चल जा;
फिर  ना मिलेगा मौका ऐसा,आज अगर जो कह ना पाया;

हाथ हिलाकर उससे पूछा -"ज़रा सा सुनिए -क्या Time हुआ है?"
पीछे मुड़कर बोली madame -"घड़ी हाथ में और Time पूछा है;
होश में है या पिया हुआ है?"
तुम जैसों की ज़ात पता है,खोटी नीयत सब दीखता है;
जहाँ भी देखी Single लड़की , यूँ  friendly होने लगते कि
"किसी ने तुम्हे invite किया है ?"

shocked हो गया बिल्कुल मैं तो,बड़ी ही violent निकली ये तो;
हिम्मत करके उससे बोला , बाबा वाले ज्ञान को ढोला;
सही कहा है तुमने बिल्कुल,हम जैसों का राज़ है खोला;

Frankly saying तुम अच्छी हो,मुझे लगा था तुम catchy हो;

Single  मैं भी,तुम भी Single , इसीलिए "Shall we mingle ?"
मुझे नहीं experience कोई,school time से रहा हुँ single ;

तुम चाहो तो थप्पड़ जड़ दो,मुझ पर कई आरोप भी मढ़ दो;
पर जो सच है मैंने सुनाया, अब चाहो तो हामी भर दो;

नहीं ज़रूरी कि मैं तुमको,हर हफ़्ते Movie ले जाऊं;
नयी Bike में तुम्हे बिठाकर , Long -Drive  पर मैं ले जाऊं;
पर ये वादा है मेरा सुन लो, आँख में ना लाऊंगा आंसू;
जो कोई Tension  तेरी होगी, सबसे पहले मैं सुलझाऊँ;

इतना कह कर turn हुआ मैं,चलने को return हुआ मैं;

अभी चला था थोड़ी दूर , कि वो बोली "Shall we meet ?";
समय मुझे दो थोड़ा सा तुम, after that I'll  greet ;

तब तक Will you do a Favor , बदल गए थे उसके तेवर;
क्या मुझको तुम drop कर दोगे , can  we friend for forever ?;

यही कहानी,बड़ी सुहानी;जिस पर based है मेरी जवानी;

"वो शाम सुहानी , मस्तानी ; जब दिल ने करी थी मनमानी ;
 Lonliness को दूर किया तब, friendship हमने कर डाली;


  

Sunday, 1 February 2015





कंट-जड़ित माला से, जब श्रृंगार हुआ था; 
एक बहुभाषीय देश में, भीषण नरसंघार हुआ था; 

जब जन्मे तब एक साथ थे, खेले तब भी एक साथ थे; 
खेत हमारे आस-पास थे, नदी और नाले साथ-साथ थे; 
गन्ने तेरे गुड़ मेरा था, सरसों तेरी साग मेरा था; 
चरती तेरी गायें जिसमें, हरा-भरा वो खेत मेरा था; 
तेरी होली रंग मेरा था, ईद मेरी और संग तेरा था; 
मन मुरीद जिससे हो जाए, आव-भगत का ढंग तेरा था; 
कपड़े मैंने तेरे पहने, खाना तूने मेरा खाया; 
भिन्न पंथ के होने पर भी, खुदा ने हमको ख़ूब मिलाया; 
पर पता किसे था दिन ऐसा भी, वो हमको दिखलायेगा; 
सदा चहकता पिंड मेरा ये, लाशों से पिट जाएगा; 
छोटी-छोटी गलियों में तब, लहू-सरिता का अविरल संचार हुआ था; 
कंट-जड़ित माला से, जब श्रृंगार हुआ था; 
एक बहुभाषीय देश में, भीषण नरसंघार हुआ था; 

हाथ अगर थे, सर गायब था; 
कहीं बदन से, पैर गायब था; 
तिरछी नज़रें, जँहा से आती; 
नुक्कड़ वाला, घर गायब था; 
खेत तो थे, पर फसलें जल गयी; 
घर की नाली नदियां बन गयी; 
बड़-बड़ करती, 'बूढ़ी काकी'; 
घर की एक, दीवार पे टंग गयी; 
सुबह-शाम हर दरवाज़े से, केवल क्रंदन-गान हुआ  था; 
कंट-जड़ित माला से, जब श्रृंगार हुआ था; 
एक बहुभाषीय देश में, भीषण नरसंघार हुआ था; '