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Thursday, 30 April 2015
Sunday, 1 February 2015
कंट-जड़ित माला से, जब श्रृंगार हुआ था;
एक बहुभाषीय देश में, भीषण नरसंघार हुआ था;
जब जन्मे तब एक साथ थे, खेले तब भी एक साथ थे;
खेत हमारे आस-पास थे, नदी और नाले साथ-साथ थे;
गन्ने तेरे गुड़ मेरा था, सरसों तेरी साग मेरा था;
चरती तेरी गायें जिसमें, हरा-भरा वो खेत मेरा था;
तेरी होली रंग मेरा था, ईद मेरी और संग तेरा था;
मन मुरीद जिससे हो जाए, आव-भगत का ढंग तेरा था;
कपड़े मैंने तेरे पहने, खाना तूने मेरा खाया;
भिन्न पंथ के होने पर भी, खुदा ने हमको ख़ूब मिलाया;
पर पता किसे था दिन ऐसा भी, वो हमको दिखलायेगा;
सदा चहकता पिंड मेरा ये, लाशों से पिट जाएगा;
छोटी-छोटी गलियों में तब, लहू-सरिता का अविरल संचार हुआ था;
कंट-जड़ित माला से, जब श्रृंगार हुआ था;
एक बहुभाषीय देश में, भीषण नरसंघार हुआ था;
हाथ अगर थे, सर गायब था;
कहीं बदन से, पैर गायब था;
तिरछी नज़रें, जँहा से आती;
नुक्कड़ वाला, घर गायब था;
खेत तो थे, पर फसलें जल गयी;
घर की नाली नदियां बन गयी;
बड़-बड़ करती, 'बूढ़ी काकी';
घर की एक, दीवार पे टंग गयी;
सुबह-शाम हर दरवाज़े से, केवल क्रंदन-गान हुआ था;
कंट-जड़ित माला से, जब श्रृंगार हुआ था;
एक बहुभाषीय देश में, भीषण नरसंघार हुआ था; '
Saturday, 20 December 2014
"हे वीर ! उठा शमशीर ! बदल तक़दीर !
आज फिर मौका आया है ;
हर क्षण पीड़ा को झेल रही भारत माँ ने ,
आज फिर तुझे बुलाया है;
हे लाल ! बुरा है हाल ,
मेरा अब तू ही सहारा है ;
इन रिपुओं पर कर वार ,उठा तलवार !
मेरा अब तू ही सहारा है ;
हर संध्या भयभीत करे है ,और क्रंदन संगीत करे है ;
पता नहीं कब कौन चला दे,सीमा पर तलवार ;
अब और नहीं बलकार ,तुझे तेरी माँ ने बुलाया है ;
आज फिर मौका आया है;
हे वीर! उठा शमशीर ! बदल तक़दीर !
तेरा बचपन , मेरा जीवन ;
मेरा जीवन ,हाथ में तेरे ;
इसे बचाना कर्म है तेरा ;
खड़े है रिपुदल ,जिसको घेरे ;
लहू-सरिता जब बहती है ,आहत मुझको कर देती है ;
लहू बहा हो चाहे जिसका ,होता छलनी मेरा सीना ;
वो भी मेरा तू भी मेरा ,तू सपूत और वो कपूत है ;
पर मैं ठहरी अबला माता ;जिसका मुश्किल हुआ है जीना ;
मेरा अंश ही ना जाने कब ,मुझ पर कर दे वार ;
अब तू ही उसे ललकार ,तुझे तेरी माँ ने बुलाया है;
आज फिर मौका आया है;
"हे वीर ! उठा शमशीर ! बदल तक़दीर !
आज फिर मौका आया है ;
हर क्षण पीड़ा को झेल रही भारत माँ ने ,
आज फिर तुझे बुलाया है;"
आज फिर मौका आया है ;
हर क्षण पीड़ा को झेल रही भारत माँ ने ,
आज फिर तुझे बुलाया है;
हे लाल ! बुरा है हाल ,
मेरा अब तू ही सहारा है ;
इन रिपुओं पर कर वार ,उठा तलवार !
मेरा अब तू ही सहारा है ;
हर संध्या भयभीत करे है ,और क्रंदन संगीत करे है ;
पता नहीं कब कौन चला दे,सीमा पर तलवार ;
अब और नहीं बलकार ,तुझे तेरी माँ ने बुलाया है ;
आज फिर मौका आया है;
हे वीर! उठा शमशीर ! बदल तक़दीर !
तेरा बचपन , मेरा जीवन ;
मेरा जीवन ,हाथ में तेरे ;
इसे बचाना कर्म है तेरा ;
खड़े है रिपुदल ,जिसको घेरे ;
लहू-सरिता जब बहती है ,आहत मुझको कर देती है ;
लहू बहा हो चाहे जिसका ,होता छलनी मेरा सीना ;
वो भी मेरा तू भी मेरा ,तू सपूत और वो कपूत है ;
पर मैं ठहरी अबला माता ;जिसका मुश्किल हुआ है जीना ;
मेरा अंश ही ना जाने कब ,मुझ पर कर दे वार ;
अब तू ही उसे ललकार ,तुझे तेरी माँ ने बुलाया है;
आज फिर मौका आया है;
"हे वीर ! उठा शमशीर ! बदल तक़दीर !
आज फिर मौका आया है ;
हर क्षण पीड़ा को झेल रही भारत माँ ने ,
आज फिर तुझे बुलाया है;"
Sunday, 7 December 2014
लबों को हरक़त दे दो , ज़रा सी ज़हमत कर दो;
इश्क़ की बंदगी में खुद को,आज तुम क़ुर्बत कर दो;
मिला कर जिस्म को रूह से , रूमानी इश्क़ को दिल से;
धड़कते दिल की धड़कन को,आज तुम सरगम दे दो;
जो तेरे गेसूं हिलते हैं , यूँ मानो बादल मिलते हैं ;
जो इनकी ख़ुश्बू आती है ,फ़िज़ा को महका जाती है;
नशीली आँखों में तेरी ,जंहा की मस्ती बस्ती है;
जो आँखें एक बार चख ले,तो फिर चखने को तरसती है;
हया भी आईने में जब , तेरा दीदार करती है ;
मुक़म्मल हो गयी है ज़न्नत , सैकड़ो बार कहती है;
तेरी ख़िदमत अब मुझको , आज इक ज़ाहिद बनने दो ;
इबादतख़ाने में मेरे ,तेरी प्यारी सी मूरत हो;
मेरी इस पाक सी ख्वाईश को,कीमती सी फरमाइश को;
डाल कर झोली में मेरी,फ़क़ीरी को रुख़्सत कर दो;
लबों को हरक़त दे दो , ज़रा सी ज़हमत कर दो;
इश्क़ की बंदगी में खुद को,आज तुम क़ुर्बत कर दो;
मिला कर जिस्म को रूह से , रूमानी इश्क़ को दिल से;
धड़कते दिल की धड़कन को,आज तुम सरगम दे दो;
इश्क़ की बंदगी में खुद को,आज तुम क़ुर्बत कर दो;
मिला कर जिस्म को रूह से , रूमानी इश्क़ को दिल से;
धड़कते दिल की धड़कन को,आज तुम सरगम दे दो;
जो तेरे गेसूं हिलते हैं , यूँ मानो बादल मिलते हैं ;
जो इनकी ख़ुश्बू आती है ,फ़िज़ा को महका जाती है;
नशीली आँखों में तेरी ,जंहा की मस्ती बस्ती है;
जो आँखें एक बार चख ले,तो फिर चखने को तरसती है;
हया भी आईने में जब , तेरा दीदार करती है ;
मुक़म्मल हो गयी है ज़न्नत , सैकड़ो बार कहती है;
तेरी ख़िदमत अब मुझको , आज इक ज़ाहिद बनने दो ;
इबादतख़ाने में मेरे ,तेरी प्यारी सी मूरत हो;
मेरी इस पाक सी ख्वाईश को,कीमती सी फरमाइश को;
डाल कर झोली में मेरी,फ़क़ीरी को रुख़्सत कर दो;
लबों को हरक़त दे दो , ज़रा सी ज़हमत कर दो;
इश्क़ की बंदगी में खुद को,आज तुम क़ुर्बत कर दो;
मिला कर जिस्म को रूह से , रूमानी इश्क़ को दिल से;
धड़कते दिल की धड़कन को,आज तुम सरगम दे दो;
Friday, 28 November 2014
भँवरे-भँवरे इधर तो आ ,कुछ ख़ास नहीं एक बात बता ;
हमें सुना तू अपनी प्यारी , मीठी -मीठी प्रेम कथा ;
भंवरा बोला:-
"एक उपवन में कई जीव थे,कुछ चलते और कुछ स्थिर ;
मैं भी उन संग रहने वाला ,वो भी उन संग रहने वाली ;
मेरा गुंजन उसे लुभाता ,उसकी महक से मैं मोहित ;
धीरे-धीरे लगा पनपने ,प्रेम अनूठा आलोकिक ;
जिसने उसको किया सुगंधित ,और हुआ मैं सम्मोहित ;
उसकी कोमल पंखुड़ियों से,रस की सरिता बहती थी;
मीठी-मीठी महक उसकी,जो प्राण मेरे हर लेती थी;
श्याम वर्ण में मुझे मिला ले;मेरे रस को अधर लगा ले;
लगे है पावन गुंजन तेरा , हर क्षण मुझसे कहती थी ;
रवि उदय के क्षण की आस ,अस्थिर हैं मेरे स्वास ;
कब आएंगे प्रियतम मेरे ,और मिटेगी मेरी प्यास ;
जल्दी आओ भ्रमर निराले,हर क्षण मुझसे कहती थी;
पर सब दिन होत ना एक समान , उपवन का भी हुआ नहीं;
मेरे प्रियतम को माली ने ,दूजा मौका दिया नहीं;
याद बड़ी उसकी है आती , जब उपवन पर नज़रें जाती;
जनम दुबारा लुंगी प्रियवर ,यही विधि की रीति थी;
कब देगा दर्शन यम के तू,मेरे ईश्वर मुझे बता ;
नए जन्म में फिर से होगा , प्रियतम मेरा साथ सदा;
यही थी उसकी और मेरी;मीठी-मीठी प्रेम कथा; "
हमें सुना तू अपनी प्यारी , मीठी -मीठी प्रेम कथा ;
भंवरा बोला:-
"एक उपवन में कई जीव थे,कुछ चलते और कुछ स्थिर ;
मैं भी उन संग रहने वाला ,वो भी उन संग रहने वाली ;
मेरा गुंजन उसे लुभाता ,उसकी महक से मैं मोहित ;
धीरे-धीरे लगा पनपने ,प्रेम अनूठा आलोकिक ;
जिसने उसको किया सुगंधित ,और हुआ मैं सम्मोहित ;
उसकी कोमल पंखुड़ियों से,रस की सरिता बहती थी;
मीठी-मीठी महक उसकी,जो प्राण मेरे हर लेती थी;
श्याम वर्ण में मुझे मिला ले;मेरे रस को अधर लगा ले;
लगे है पावन गुंजन तेरा , हर क्षण मुझसे कहती थी ;
रवि उदय के क्षण की आस ,अस्थिर हैं मेरे स्वास ;
कब आएंगे प्रियतम मेरे ,और मिटेगी मेरी प्यास ;
जल्दी आओ भ्रमर निराले,हर क्षण मुझसे कहती थी;
पर सब दिन होत ना एक समान , उपवन का भी हुआ नहीं;
मेरे प्रियतम को माली ने ,दूजा मौका दिया नहीं;
याद बड़ी उसकी है आती , जब उपवन पर नज़रें जाती;
जनम दुबारा लुंगी प्रियवर ,यही विधि की रीति थी;
कब देगा दर्शन यम के तू,मेरे ईश्वर मुझे बता ;
नए जन्म में फिर से होगा , प्रियतम मेरा साथ सदा;
यही थी उसकी और मेरी;मीठी-मीठी प्रेम कथा; "
जब तक तू मुझसे दूर थी , मैं आदमी मतलब का था ;
अब जब तू मुझसे दूर थी, मतलब मेरा ही क्या रहा?
सपनों में जब तू थी नहीं , रातों को सोता था सही ;
अब जब तू सपनों से गयी ,सोकर भी मैं सोता नहीं;
Monday, 9 June 2014
super 30 के दड़बे में रहते थे मुर्गे उन्नीस ,
साथ साथ में रहते -खाते , और मचाते धूम-धड़ाका ;
सोते अलग समय पर साले , पर साथ खर्राटे लेते ज्यादा ;
इसीलिए गृहस्वामी की नज़रो में हो गए खुन्नस ;
super 30 के दड़बे में रहते थे.………
मुर्गा ऐसा एक था साला , डर के पहले सबसे भागा ;
नाम अमित था फिर भी साला , लगता था बिलकुल काला ;
गलती नहीं थी उसकी यारों , थी कठिनाई इतनी ज्यादा ;
शुरु शुरू में देखो यारो , बिन दरवाज़े शौच जाना ;
ठंडा बासी खाना मिलता वो भी साला पिल्लू वाला ;
दाल खिलाई जाती ऐसी , जैसे हो dilute solution ;
और चावल की बात छोड़ो , जैसे कंकड़ के suspension ;
ऐसे condition में ,कैसे रहेगा कोई species ;
super 30 के दड़बे में रहते थे मुर्गे उन्नीस ;
यही नहीं था एक वो कारण , जिसके लिए था वो भागा ;
शिक्षक के स्तर के कारण ,टूट गया देखो धागा ;
बिहार रत्न से हम थे पढ़ते , इसीलिए खुद गर्व भी करते ;
पर रत्न रत्न नहीं था , था वो A.D ;
सीधी बातें भी करता था एक दम टेढ़ी ,
chemistry का होकर teacher , अनुपस्थित थे उसमे feature ;
हर concept से question के आने की देता gurantee ;
इसीलिए राजीव के बदले नाम पड़ा उसका guraantee ;
देख के teacher घूम गया उसका axis ;
super 30 के दड़बे में रहते थे मुर्गे उन्नीस ;
खुद तो भागा अमित कुमार , करके दो को और तैयार ;
नाम था उनका प्यारा प्यारा , अंशुमन और प्रणय कुमार ;
पर ये बेचारे भी ऐसे जाने को थे नहीं तैयार ;
शिक्षक के कारण देखो , ये भी हो गए थे लाचार ;
physics के teacher थे B.P.Singh , जैसे young की dark fringe ;
पूछते थे ऐसे definition , जैसे हम हो from foundation ;
एक दिन lecture के दौरान , पूछ दिया हमसे refraction ;
question का कर हमपर वार , दिखा दिया अद्भुत संसार ;
इसीलिए साले का हमने , नाम रखा अद्भुत संसार ;
गणित-वणित की बात तो छोड़ो , ऐसा था हमरा fortune ;
IIT के प्रथम सत्र से , लाये थे एक teacher चुन ;
नाम था उनका A.N.Sinha , पर वो पढ़ाते एकदम धीमा ;
complex को variate कराते , कम पढ़ने का गुर सिखलाते ;
डेढ़ घंटे की class को वो तो , आधे में थे बंद करवाते ;
physics पढ़ाने को फिर से आगये देखो एक सज्जन ;
Blackbody होने के कारण , इन होता zero-action ;
ये जो कहते वही syllabus , ये थे system से बेबस ;
नाम था इनका श्यामसुन्दर , श्याम तो थे पर नहीं थे सुन्दर;
चिट्ठे-पुर्जे भर कर लाते , आकर फिर question लिखवाते ;
answer सही नहीं आने पर , दूसरे question को करवाते;
देख यहाँ की बिगड़ी हालत , उन्हें लगा की वो vanish ;
super 30 के दड़बे में रहते थे मुर्गे उन्नीस ;
यह तो थी कक्षा की बातें , hostel की अब देखो रातें ;
pressure में आने के कारण , रात को बनते Question सारे;
जब भी कोई party होती , खाना-खज़ाना जाते सारे ;
अब बारी naming की आई, जिसने नयी पहचान दिलाई ;
अभिजीत ने guarantee के ऊपर चला दी थी question-tank ;
इसीलिए हमने साले का नाम रखा था question -bank ;
एक लड़के का नाम था मोहित , फिर भी दिखता उसमे दोष ;
उसकी लम्बी कलम के कारण नाम पड़ा उसका carlosh ;
अंकित की गंजी थी ऐसी दिखता जिस पर batook लिखा;
इसीलिए अंकित का नाम प्यार से हमने batook रखा;
अब बारी थी चचा जां की,जो थे मेरे बहुत अज़ीज़ ;
नाम तो उनका अभ्युदय था;खाना खाते बड़ा लज़ीज़ ;
उम्र में कम थे , दिखते ज्यादा
पर वो निभाते अपना वादा ;
इस हेतु देने सम्मान ,चचा रखा हमने नाम ;
सम्पादक के पुत्र महाशय , सुन्दर के संग बहुत थे प्यारे ;
नाम नामित था पर यह पुराना ,हमको था कुछ नया बनाना ;
नवाबो के शहर से आये,इसीलिए नवाब कहाये ;
अपने मीठे व्यवहार के कारण , देखो सबको बहुत सुहाए ;
confusion के थे भण्डार , नाम था उनका प्रवीण कुमार ;
नामकरण करने में इनका , हुई परेशानी सबसे ज्यादा ;
जब हम बैठे नाम को लिखने , page भर गया हमरा आधा ;
ओ B.C.E.C.E , ओ CBSE , ओ NCERT,ओ YDSE ,ओOBC
ओ ST SC,ओ S.C.R.A,ओ CC BC, ओ हमरे बाबा ,
छतरी के बाबा , ओ बाबा बाबा
दिखता छोटा पर सुई सा , गौरव आया था मुंगेर से;
रट लेता वो हर chapter के पुरे पन्ने तन-मन से;
छोटा सा दिखने के कारण बिल्टू हमने उसे पुकारा;
राजपूत होने के कारण सिंह भी हमने दिया दुबारा ;
मूछें रखता बड़की बड़की , बातें करता जैसे लड़की ;
विद्यासागर नाम था पहला , हमने रखा ग्रामीण महिला ;
नाम रवि पर तेज कहाँ , सब तो जाता था H.M में ;
कारण उसके दुबलेपन का , छुप रखा था H.M में;
एक शहर के रहने वाले , H.M के थे ख़ास दूबे ;
दिन भर Physics बनाने वाले , कटिहार निवासी अभिषेक दूबे ;
नमित के संग Arm Wrestling में , खूब दिखाया अपना force ;
पटना वाले किशन का नाम , हमने रखा था खरगोश ;
विशालकाय देह के स्वामी,
पढ़ने में ना की बेईमानी ;
Joshep के कौशिक मित्रा ने सीखा दिया B'Day का सलीका ;
भारी-भरकम देह के कारण , नाम पुकारा गया ख़लीफ़ा ;
मोह-माया से परे वो रहता ,
प्रेतों की रामायण कहता ;
आँख में चश्मा , हाथ में पुस्तक , और पूरा ध्यान लगाकर ;
अपने आप से मतलब रखकर, पढ़ता रहता था प्रभाकर ;
सोना , खाना और खेलना , ये थे उसके सारे काम ;
कर में पुस्तक ज्यों ही विराजे ,करने लगता था आराम ;
चाचा लगता था दुबे का , इस हेतु देने सम्मान ;
आनंद हटा कर नया दिया ,और Andy रखा उसका नाम ;
नाम बड़ा और दर्शन छोटे , ऐसा भी एक प्राणी था ;
cheating करके number लाता , सबकी हां में हां मिलाता ;
हम सब सीधे बच्चों में , ऐसा भी एक प्राणी था;
झूठी बातों का अड्डा था , नाम उसका दद्दा था ;
गोरा था पर काली आँखें , जिनको रखता दिन भर फाड़ ;
हिमांशु का नाम बदल कर , हमने रखा था बिल्लाड ;
H.M को टक्कर देता , कमरे को campus कर देता;
पेट में 6-6 abs बनाकर , हम सबको विस्मित कर देता ,
अमित नाम था उसका पुराना , AbsMan हमने दे डाला ;
लिख-लिख कर सब के बारे में , बन गयी देखो पूरी thesis ;
super 30 के दड़बे में रहते थे मुर्गे उन्नीस ................................
A work of reality, no fiction at all...................................................Kumar Mohit
साथ साथ में रहते -खाते , और मचाते धूम-धड़ाका ;
सोते अलग समय पर साले , पर साथ खर्राटे लेते ज्यादा ;
इसीलिए गृहस्वामी की नज़रो में हो गए खुन्नस ;
super 30 के दड़बे में रहते थे.………
मुर्गा ऐसा एक था साला , डर के पहले सबसे भागा ;
नाम अमित था फिर भी साला , लगता था बिलकुल काला ;
गलती नहीं थी उसकी यारों , थी कठिनाई इतनी ज्यादा ;
शुरु शुरू में देखो यारो , बिन दरवाज़े शौच जाना ;
ठंडा बासी खाना मिलता वो भी साला पिल्लू वाला ;
दाल खिलाई जाती ऐसी , जैसे हो dilute solution ;
और चावल की बात छोड़ो , जैसे कंकड़ के suspension ;
ऐसे condition में ,कैसे रहेगा कोई species ;
super 30 के दड़बे में रहते थे मुर्गे उन्नीस ;
यही नहीं था एक वो कारण , जिसके लिए था वो भागा ;
शिक्षक के स्तर के कारण ,टूट गया देखो धागा ;
बिहार रत्न से हम थे पढ़ते , इसीलिए खुद गर्व भी करते ;
पर रत्न रत्न नहीं था , था वो A.D ;
सीधी बातें भी करता था एक दम टेढ़ी ,
chemistry का होकर teacher , अनुपस्थित थे उसमे feature ;
हर concept से question के आने की देता gurantee ;
इसीलिए राजीव के बदले नाम पड़ा उसका guraantee ;
देख के teacher घूम गया उसका axis ;
super 30 के दड़बे में रहते थे मुर्गे उन्नीस ;
खुद तो भागा अमित कुमार , करके दो को और तैयार ;
नाम था उनका प्यारा प्यारा , अंशुमन और प्रणय कुमार ;
पर ये बेचारे भी ऐसे जाने को थे नहीं तैयार ;
शिक्षक के कारण देखो , ये भी हो गए थे लाचार ;
physics के teacher थे B.P.Singh , जैसे young की dark fringe ;
पूछते थे ऐसे definition , जैसे हम हो from foundation ;
एक दिन lecture के दौरान , पूछ दिया हमसे refraction ;
question का कर हमपर वार , दिखा दिया अद्भुत संसार ;
इसीलिए साले का हमने , नाम रखा अद्भुत संसार ;
गणित-वणित की बात तो छोड़ो , ऐसा था हमरा fortune ;
IIT के प्रथम सत्र से , लाये थे एक teacher चुन ;
नाम था उनका A.N.Sinha , पर वो पढ़ाते एकदम धीमा ;
complex को variate कराते , कम पढ़ने का गुर सिखलाते ;
डेढ़ घंटे की class को वो तो , आधे में थे बंद करवाते ;
physics पढ़ाने को फिर से आगये देखो एक सज्जन ;
Blackbody होने के कारण , इन होता zero-action ;
ये जो कहते वही syllabus , ये थे system से बेबस ;
नाम था इनका श्यामसुन्दर , श्याम तो थे पर नहीं थे सुन्दर;
चिट्ठे-पुर्जे भर कर लाते , आकर फिर question लिखवाते ;
answer सही नहीं आने पर , दूसरे question को करवाते;
देख यहाँ की बिगड़ी हालत , उन्हें लगा की वो vanish ;
super 30 के दड़बे में रहते थे मुर्गे उन्नीस ;
यह तो थी कक्षा की बातें , hostel की अब देखो रातें ;
pressure में आने के कारण , रात को बनते Question सारे;
जब भी कोई party होती , खाना-खज़ाना जाते सारे ;
अब बारी naming की आई, जिसने नयी पहचान दिलाई ;
अभिजीत ने guarantee के ऊपर चला दी थी question-tank ;
इसीलिए हमने साले का नाम रखा था question -bank ;
एक लड़के का नाम था मोहित , फिर भी दिखता उसमे दोष ;
उसकी लम्बी कलम के कारण नाम पड़ा उसका carlosh ;
अंकित की गंजी थी ऐसी दिखता जिस पर batook लिखा;
इसीलिए अंकित का नाम प्यार से हमने batook रखा;
अब बारी थी चचा जां की,जो थे मेरे बहुत अज़ीज़ ;
नाम तो उनका अभ्युदय था;खाना खाते बड़ा लज़ीज़ ;
उम्र में कम थे , दिखते ज्यादा
पर वो निभाते अपना वादा ;
इस हेतु देने सम्मान ,चचा रखा हमने नाम ;
सम्पादक के पुत्र महाशय , सुन्दर के संग बहुत थे प्यारे ;
नाम नामित था पर यह पुराना ,हमको था कुछ नया बनाना ;
नवाबो के शहर से आये,इसीलिए नवाब कहाये ;
अपने मीठे व्यवहार के कारण , देखो सबको बहुत सुहाए ;
confusion के थे भण्डार , नाम था उनका प्रवीण कुमार ;
नामकरण करने में इनका , हुई परेशानी सबसे ज्यादा ;
जब हम बैठे नाम को लिखने , page भर गया हमरा आधा ;
ओ B.C.E.C.E , ओ CBSE , ओ NCERT,ओ YDSE ,ओOBC
ओ ST SC,ओ S.C.R.A,ओ CC BC, ओ हमरे बाबा ,
छतरी के बाबा , ओ बाबा बाबा
दिखता छोटा पर सुई सा , गौरव आया था मुंगेर से;
रट लेता वो हर chapter के पुरे पन्ने तन-मन से;
छोटा सा दिखने के कारण बिल्टू हमने उसे पुकारा;
राजपूत होने के कारण सिंह भी हमने दिया दुबारा ;
मूछें रखता बड़की बड़की , बातें करता जैसे लड़की ;
विद्यासागर नाम था पहला , हमने रखा ग्रामीण महिला ;
नाम रवि पर तेज कहाँ , सब तो जाता था H.M में ;
कारण उसके दुबलेपन का , छुप रखा था H.M में;
एक शहर के रहने वाले , H.M के थे ख़ास दूबे ;
दिन भर Physics बनाने वाले , कटिहार निवासी अभिषेक दूबे ;
नमित के संग Arm Wrestling में , खूब दिखाया अपना force ;
पटना वाले किशन का नाम , हमने रखा था खरगोश ;
विशालकाय देह के स्वामी,
पढ़ने में ना की बेईमानी ;
Joshep के कौशिक मित्रा ने सीखा दिया B'Day का सलीका ;
भारी-भरकम देह के कारण , नाम पुकारा गया ख़लीफ़ा ;
मोह-माया से परे वो रहता ,
प्रेतों की रामायण कहता ;
आँख में चश्मा , हाथ में पुस्तक , और पूरा ध्यान लगाकर ;
अपने आप से मतलब रखकर, पढ़ता रहता था प्रभाकर ;
सोना , खाना और खेलना , ये थे उसके सारे काम ;
कर में पुस्तक ज्यों ही विराजे ,करने लगता था आराम ;
चाचा लगता था दुबे का , इस हेतु देने सम्मान ;
आनंद हटा कर नया दिया ,और Andy रखा उसका नाम ;
नाम बड़ा और दर्शन छोटे , ऐसा भी एक प्राणी था ;
cheating करके number लाता , सबकी हां में हां मिलाता ;
हम सब सीधे बच्चों में , ऐसा भी एक प्राणी था;
झूठी बातों का अड्डा था , नाम उसका दद्दा था ;
गोरा था पर काली आँखें , जिनको रखता दिन भर फाड़ ;
हिमांशु का नाम बदल कर , हमने रखा था बिल्लाड ;
H.M को टक्कर देता , कमरे को campus कर देता;
पेट में 6-6 abs बनाकर , हम सबको विस्मित कर देता ,
अमित नाम था उसका पुराना , AbsMan हमने दे डाला ;
लिख-लिख कर सब के बारे में , बन गयी देखो पूरी thesis ;
super 30 के दड़बे में रहते थे मुर्गे उन्नीस ................................
A work of reality, no fiction at all...................................................Kumar Mohit
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